हितोपदेश. 7. ओ ङए च्ह, ङइ बिबै ताँमैं ङिंन्, धै ङइ बिबै ताँमैं क्हिए सैंर थेंन्; ङइ बिबै ताँमैं ङिंस्याँ क्हिए छ्ह छ्याँब तब्मुँ; क्हिए मि फुँ जोगेब् धोंले ङए अर्तिमैं जोगेसि थेंन्। योर च्या खिब् धोंले ङइ बिबै अर्थिमैं सैंर थेंन्; धै क्हिए खोंर प्ह्रिथेंन्। बुद्धिने “क्हि ङए अङाँ ग,” बिदु, धै क्होल् खाँबै शक्‍तिने ङइ खोबै थु ग बिद्। चइ फ्यालुस्योउँइँले क्हि ह्रेंगो थेंब्मुँ, धै लिरिक्‍ले पोंसि फसेल् म्हैबै च्हमिरिउँइँले क्हि जोगेब्मुँ। ङ ह्रोंसए धिंर्बै झ्यालर टिसि झ्यालउँइँले बैरु ङ्ह्‍योमा तो म्रोंइ बिस्याँ, आह्र-आसेबै फ्रेंसिमैंए म्हाँजोर कत्ति क्होल् आखाँबै म्हि घ्रि ङइ म्रोंइ। त्हिंइ लियासि ङेंस तमा मिछु खैबै त्हेर च म्हि फ्रें क्ल्योंप्रबै च्हमिरि टिबै धिंर्बै घ्याँर प्ररिल, धै चए धिंउँइँन ह्‍यारिल। च्हमिरि घ्रि चने त्होबर खइ, चलाइ फसेबै ल्हागिर च फ्यालुस्योमैं धोंले पैरेसि खल। च केर आफेबै ताँ पोंब नेरो आगुए ताँ थोबै ट्होगोस्यो मुँल; च खोंयोंइ धिंर आटि, खोंयों घ्याँजरे, खोंयों बजारजरे, खोंयों कुनाकाप्चाजरे च लोसि टिम्। च म्हिलाइ क्हासि च च्हमिरिइ म्वें लसि फा आपिल्‍ले बिइ: “तिंयाँ ङइ लबै भक्‍कल पूरा लसि ङए धिंर ख्रो पिंबउँइँले से मुँ। छतसि क्हिने त्होबर ङ बैरु युब् ग, ङइ क्हि म्हैल, तोगो स्याइमुँ। ङ रोबै क्‍ल्‍ह्‍योर ङइ, मिश्र ह्‍युलर्बै बुट्टा झोंबै च्यातर तिइमुँ; ङ रोबै क्‍ल्‍ह्‍योर छ्याँबै थाँ खबै मूर्र, घ्युकुमारि नेरो लेबोमैं फ्रुँसि छ्याँबै थाँ खल् लथेंइमुँ। छतसि खो, न्हाँग समा ङ्यो म्हाँया लदै अँगलो ख्वेसि बेल्‍ले सैं तोंदै टिले। तलेबिस्याँ ङए प्युँ धिंर आरे, च ह्रेंगो ह्‍याइमुँ, चइ मुइ ल्हेंन् बोइमुँ, धै सत् ङ्हिं समा च धिंर आख।” वाँ-वाँसि च म्हिलाइ चइ भुत्तुक्‍कन लवाइ, धै लिरिक्‍ले पोंसि चलाइ फसेवाइ। धै सैबर बोबै क्ल्या धोंले, धै तिंर मेइ आम्‍लोन् समा फो सैं तोंदै उफर्दिमा ङोर फेब् धोंले, च म्हि युन्ले च च्हमिरिए लिलि ह्‍याइ। धै नमें युन्ले ङोउँइ ह्‍याब् धोंले च म्हिइ ह्रोंस नास लम् बिबै ताँ चइ आसे। ओ ङए च्हमैं, ङए ताँ थेद्, धै ङइ बिबै ताँमैंर न्ह तोद्। च च्हमिरिए फिर क्हेमैंए सैं आह्‍यारिगे; धै चए लिलि आप्रद्, चइ ल्हें म्हि नास लवाइमुँ, धै चइ सैवाब्मैं ल्हेंन् मुँ। धै चए धिंर ह्‍याब्मैं क्रोंर म्हैबर ह्‍याब्मैं ग, चर ह्‍याब्मैं कालए ङाँर फेनेम्।